Thursday, January 11, 2018

मकर सक्रांति पुष्टिमार्ग में

💐 *भोगी उत्सव..१.*.💐
🙏�.. दिनांक.. १३/१४.. जान्युआरी.
          २०१८.. 🙏�

👌�भोगी भोग करत सब रसको,
🌺नंदनंदन जसोदा को जीवन,
🌺गोपीन मान पति सर्वस को ।।१।।
☘तिलभर संग तजत नहीं निजजन,
🌻गान करत मनमोहन जसकों।।
🍀तिलतिल भोग धरत मन भावन,
🏵"परमानंद" सुख ले यह रसको।।२।।
      *विषेश भावार्थ*
❤ प्रभु क्या क्या रसका भोग करत है ?
*१.. नंदरायजी के साथ.. पुत्र भावक*
*२.. जसोदाजी के साथ.. वात्सल्यभाव..*
*३.. गोपीजनों साथ माधुर्यभाव ,मान-भाव और सब के रक्षक-पति भाव.*
*४..सखाओं के साथ.. सख्यभाव का भोग करते है*
*५.. नंदरायजी की साथ राजस भाव,*
      *श्रीयशोदामाताजी की साथ सात्विक भाव और गोपीजनों साथ तामस भाव और सर्व के पति रक्षक होने का निर्गण भाव का भोग करते ह*ै.. *" भोगी भोग करत सब रसको"*
*प्रभु भोक्ता है,और जड-जीव सृष्टि भोग्य है..       ।।१।।
💐यह भोगी अपना भोग्य का संग क्षणभर ( तिलभर) भी छोडता नहीं,यह उत्तम भोगी का लक्षण है।
🌴( हर जड-जीव में सच्चिदानंदत्व सर्वकाल होता है ही। जीव में अंतर्यामी-परमात्मा स्वरुप से भी होता है,ईसलिये आपश्री जीव या जड को तिलभर भी त्यजते नहीं)
            🎄ईस प्रकार,प्रभु जिनको अपना जानते है,उनको संयोगरुप से हर वक्त संगी बनाते है,और विप्रयोग में,अंतःकरण में बिराजकर संगी बनाता है- ईसलिये यह भोगी क्षणभर  भी निज्जनको छोडते नहीं ( तिलभर संग तजत नहि निज्जन )
      ❤ यह भक्तों भी भोगी का यशगान करत है,ईसलिये भोगी को जो जो पसंद है ,वह सब चीजें ( तील-तील...असंख्य) भोग धरते रहते है और प्रभु मी,भक्तों का यह भोग का स्नेहसे अंगिकार करते है अथवा
☘" *प्रभु भोगी जो रस* *का उपयोग करता है,यह परम-आनंद रुप है*
    *जैसे.. पद्मनाभदासजी ने छोले के अलग अलग ढग करके* *उसमें सब सामग्री का भाव किया और प्रभु  प्रसन्नता पूर्वक आरोगेल और* *श्रीगिरधरजीको कहा "आपके छप्पनभोग भोग में छोला जैसा स्वाद नहीं है.*... *ऐसा यह है भोगी..*.

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