श्याम सोंह कुच परस कियो।। नंद सदनते अबही आवत, ओर बिपीनको नाम लियो।। ऐसी सपथ करो काहे को, जो कछु आज करी सो करी।। अब जो काल अनंत सिधारो, तब जानोगे तुमने हरी ।। में सत भाव मिल हसी तुमसो , जहा आजकी सोंह करी।। सूर श्याम भई सो भई , अबते सबको नेम धरो।।।
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