Showing posts with label पुष्टिमार्ग. Show all posts
Showing posts with label पुष्टिमार्ग. Show all posts

Saturday, October 29, 2016

प्रभु भक्ति worship

चरन कमल बंदौ हरि राई ।
जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै आंधर कों सब कछु दरसाई॥
बहिरो सुनै मूक पुनि बोलै रंक चले सिर छत्र धराई ।
सूरदास स्वामी करुनामय बार-बार बंदौं तेहि पाई ॥१॥

श्री प्रभु के चरण कमलों को ध्यान करो
प्रभु की कृपा से पंगु (लँगड़ा, पैर रहित) व्यक्ति भी पर्वत लांघ सकता हैं।
अंधे दृष्टी हीन को भी सब दिखने लगता हैं।
बहरा जिसे सुनाई न देता हो वह भी सुन सकने में समर्थ हो जाता हैं।
गूंगा जो बोल न पाता हो वह भी बोलने लगता हैं।
प्रभु के कृपा हो तो निर्धन व्यक्ति राजा बन जाता हैं।
सूरदास जी के प्रभु बहुत कृपालु है।
इन्हें प्रेम श्रद्धा और भक्ति से स्मरण करके प्राप्त किया जा  सकता हैं।

(यह पद सूरदास जी द्वारा लिखा गया। पद और इसका अर्थ विद्यारत्न व्यास, नाथद्वारा वाले की पुस्तक 'ब्रज लीला हरि पुष्टि सौरभ' से लिया गया है। इस पुस्तक जी में पुष्टिमार्ग के अष्ट छाप सखाओं के लिखे हुए पद दिए गए हैं और हर पद के सामने उसका आसान हिंदी अनुवाद छापा गया है ताकि भक्तों और वैष्णवों को समझने में आसानी हो।)

Friday, October 28, 2016

Dhan -Teras धन तेरस

बिलावल

धन तेरस रानी धन धोवति।
गर्ग बुलाई वेद विधि पूजति ठौर ठौर घृत दीप संजोवती।।1।।
धूप दीप नैवेद्य भोग धरि, श्यामसुंदर इक टक मुख जोवति।
"परमानन्द" त्यौहार मनावती, सब ब्रज पुष्टि मारग धन बोवति।।2।।

अनुवाद- अर्थ -

धन तेरस को जसोदा रानी जी धन (गहने) को धो रही हैं। श्रीगर्ग मुनि को बुलाकर वेद की विधि से पूजा कर रही हैं। जगह जगह पर, दीप जला कर रखे हैं। धूप दीप, नैवेद्य और भोग रख कर श्रीश्यामसुन्दर का मुख दर्शन कर रही हैं। श्री परमानन्द दास जी कहते है कि सब ब्रज में पुष्टिमार्ग, रूपी धन बो कर त्यौहार मना रही हैं।

(यह पद परमानन्द दास जी द्वारा लिखा गया। पद और इसका अर्थ विद्यारत्न व्यास, नाथद्वारा वाले की पुस्तक 'ब्रज लीला हरि पुष्टि सौरभ' से लिया गया है। इस पुस्तक जी में पुष्टिमार्ग के अष्ट छाप सखाओं के लिखे हुए पद दिए गए हैं और हर पद के सामने उसका आसान हिंदी अनुवाद छापा गया है ताकि भक्तों और वैष्णवों को समझने में आसानी हो।)

ब्रज लीला हरि पुष्टि सौरभ पुस्तकजी में यह पद 1334 नम्बर पर उपलब्ध हैं।